विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में और गिरी भारत की रैंकिंग, जानें कितने पर है भारत

बेशक प्रेस को लोकतंत्र को चौथा स्तंभ कहा जाता हो और इसकी आजादी और स्वतंत्रता को लेकर तमाम बातें की जाती हों, लेकिन भारत में इसकी स्थिति ठीक नहीं है। अनगिनत मीडिया हाउस वाले भारत में प्रेस की स्वतंत्रा चिंताजनक है और इस मामले में भारत लगातार पीछे जा रहा है। यह हम नहीं, बल्कि ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (आरएसएफ) द्वारा जारी रिपोर्ट कह रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 150वें नंबर पर है। पिछले साल भारत इसमें 142वें नंबर पर था।

जानें टॉप-5 देशों के नाम

स्वतंत्रता के मामले में इस साल नॉर्वे पहले नंबर पर, डेनमार्क दूसरे नंबर पर, स्वीडन तीसरे नंबर पर, एस्टोनिया चौथे नंबर पर और फिनलैंड पांचवें नंबर पर है। रैंकिंग में उत्तर कोरिया 180 देशों और क्षेत्रों की सूची में सबसे नीचे है। वहीं यूक्रेन से युद्ध कर रहे रूस को इस रैंकिंग में 155वें नंबर पर रखा गया है, जबकि पिछले साल वह 150वें स्थान से नीचे था। वहीं चीन इस बार 175वें स्थान पर आ गया है, पिछले साल चीन 177वें स्थान पर था।

अफसर भी करें स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान

रिपोर्टर्स सेन्स फ्रंटियर्स (आरएसएफ) ने कहा कि ”भारतीय अधिकारियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए, राजनीति से प्रेरित आरोपों में हिरासत में लिए गए किसी भी पत्रकार को रिहा कर देना चाहिए और उन्हें निशाना बनाना तथा स्वतंत्र मीडिया का गला घोंटना बंद करना चाहिए।” अधिकारियों द्वारा पत्रकारों को निशाना बनाने के साथ-साथ असहमति पर व्यापक कार्रवाई ने हिंदू राष्ट्रवादियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से भारत सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को धमकाने, परेशान करने और दुर्व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

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